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श्री दुर्गा यंत्र (Durga Yantra)

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गुरुत्व ज्योतिष ई पत्रीका अक्टूबर-2012 में प्रकशित लेख

October-2012 free monthly Astrology Magazines, You can read in Monthly GURUTVA JYOTISH Magazines Astrology, Numerology, Vastu, Gems Stone, Mantra, Yantra, Tantra, Kawach & ETC Related Article absolutely free of cost.
गुरुत्व ज्योतिष ई पत्रीका अक्टूबर-2012 में प्रकशित लेख
नवरात्र विशेष विशेष
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अनुक्रम
नवरात्र
विशेष में पढे़
मां दुर्गा की उपासना क्यों की जाती हैं?
6
प्रथम शैलपुत्री
7
द्वितीयं ब्रह्मचारिणी
8
तृतीयं चन्द्रघण्टा
9
चतुर्थ कूष्माण्डा
10
पंचम स्कंदमाता
11
षष्ठम् कात्यायनी
12
सप्तम कालरात्रि
13
अष्टम महागौरी
14
नवम् सिद्धिदात्री
15
शारदीय नवरात्र व्रत से सुख-समृद्धि दायक हैं
16
नवरात्र व्रत की सरल विधि?
17
देवी कृपा से मनोवांच्छित कार्यो सिद्धि
18
सरल विधि-विधान से शारदीय नवरात्र व्रत
19
आश्विन नवरात्रि घट स्थापना मुहूर्त
20
नवरात्र स्पेशल घट स्थापना विधि
22
नवार्ण मंत्र द्वारा नवग्रह कष्ट निवारण
26
कामनापूर्ति हेतु नवार्ण मंत्र साधना
28
पति-पत्नी में कलह निवारण हेतु
30
कुमारी पूजन से सकल मनोरथ सिद्ध होते हैं।
31
माँ दुर्गा के चमत्कारी मन्त्र
46
नवरात्र में लाभदायक कन्या पूजन
49
मां के चरणों निवास करते समस्त हैं तीर्थ
54
पंच देवोपासना में उपयुक्त एवं निषिद्ध पत्र पुष्प
55
हमारेउत्पाद
भाग्य लक्ष्मी दिब्बी
18
दुर्गा बीसा यंत्र
21
मंत्रसिद्ध स्फटिक श्री यंत्र
29
सर्व कार्य सिद्धि कवच
63
सर्वसिद्धिदायक मुद्रिका
64
द्वादश महा यंत्र
65
शनि पीड़ा निवारक 
68
श्री हनुमान यंत्र
70
मंत्रसिद्ध लक्ष्मी यंत्रसूचि
71
मंत्र सिद्ध
दैवी यंत्र सूचि
71
मंत्र सिद्ध रूद्राक्ष
73
श्रीकृष्ण बीसा यंत्र / कवच
74
राम रक्षा यंत्र
75
जैन धर्मके विशिष्ट यंत्र
76
घंटाकर्ण महावीर सर्व सिद्धि महायंत्र
77
अमोद्य महामृत्युंजय कवच
78
राशी रत्न एवं उपरत्न 
78
सर्व रोगनाशक यंत्र/
95
मंत्र सिद्ध कवच
97
YANTRA LIST
98
GEM STONE
100
स्थायी लेख
संपादकीय
4
मासिक
राशि फल
79
सितम्बर
2012 मासिक पंचांग
83
सितम्बर-2012
मासिक व्रत-पर्व-त्यौहार
85
सितम्बर
2012 -विशेष योग
91
दैनिक
शुभ एवं अशुभ समय ज्ञान तालिका
91
दिन-रात के चौघडिये
92
दिन-रात कि होरासूर्योदय से सूर्यास्त तक
93
ग्रह चलन सितम्बर -2012
94
सूचना
102
हमारा
उद्देश्य
104
GURUTVAJYOTISH E-MAGAZINE OCT-2012

OCT-2012

 

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मां सिद्धिदात्री के पूजन से ऋद्धि, सिद्धि कि प्राप्ति होती हैं

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नवम् सिद्धिदात्री
लेख साभार: गुरुत्व ज्योतिष पत्रिका (अक्टूबर-2010)
नवरात्र के  नौवें दिन मां के सिद्धिदात्री स्वरूप का पूजन करने का विधान हैं।
देवी  सिद्धिदात्री का स्वरूप कमल आसनपर विराजित, चार भुजा वाला, दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में चक्र, ऊपर वाले हाथ में गदा, बाई तरफ से नीचेवाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में कमल पुष्प सुशोभित रहते हैं।
मंत्र :सिद्धगंधर्वयक्षाद्यैरसुरैररमरैरपि।सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।।
ध्यान:-
वन्दे वांछितमनरोरार्थेचन्द्रार्घकृतशेखराम्।
कमलस्थिताचतुर्भुजासिद्धि यशस्वनीम्॥
स्वर्णावर्णानिर्वाणचक्रस्थितानवम् दुर्गा त्रिनेत्राम।
शंख, चक्र, गदा पदमधरा सिद्धिदात्रीभजेम्॥
पटाम्बरपरिधानांसुहास्यानानालंकारभूषिताम्।
मंजीर, हार केयूर, किंकिणिरत्नकुण्डलमण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वदनापल्लवाधराकांत कपोलापीनपयोधराम्।
कमनीयांलावण्यांक्षीणकटिंनिम्ननाभिंनितम्बनीम्॥
स्तोत्र:-
कंचनाभा शंखचक्रगदामधरामुकुटोज्वलां।स्मेरमुखीशिवपत्नीसिद्धिदात्रीनमोअस्तुते॥
पटाम्बरपरिधानांनानालंकारभूषितां।नलिनस्थितांपलिनाक्षींसिद्धिदात्रीनमोअस्तुते॥
परमानंदमयीदेवि परब्रह्म परमात्मा।परमशक्ति,परमभक्तिसिद्धिदात्रीनमोअस्तुते॥
विश्वकतींविश्वभर्तीविश्वहतींविश्वप्रीता।विश्वर्चिताविश्वतीतासिद्धिदात्रीनमोअस्तुते॥
भुक्तिमुक्तिकारणीभक्तकष्टनिवारिणी।भवसागर तारिणी सिद्धिदात्रीनमोअस्तुते।।
धर्माथकामप्रदायिनीमहामोह विनाशिनी।मोक्षदायिनीसिद्धिदात्रीसिद्धिदात्रीनमोअस्तुते॥
कवच:-
ओंकार: पातुशीर्षोमां, ऐं बीजंमां हृदयो।हीं बीजंसदापातुनभोगृहोचपादयो॥ललाट कर्णोश्रींबीजंपातुक्लींबीजंमां नेत्र घ्राणो।कपोल चिबुकोहसौ:पातुजगत्प्रसूत्यैमां सर्व वदनो॥
मंत्र-ध्यान-कवच- का विधि-विधान से पूजन करने वाले व्यक्ति का निर्वाण चक्र जाग्रत होताहैं। सिद्धिदात्री के पूजन से व्यक्ति कि समस्त कामनाओं कि पूर्ति होकर उसे ऋद्धि, सिद्धि कि प्राप्ति होती हैं। पूजन से यश, बल और धन कि प्राप्ति कार्यो में चले आ रहे बाधा-विध्नसमाप्त हो जाते हैं। व्यक्ति कोयश, बल और धन कि प्राप्ति होकर उसे मां कि कृपा से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष कि भी प्राप्ति स्वतः हो जाती हैं।
>> गुरुत्वज्योतिष पत्रिका (अक्टूबर -2010)
OCT-2010

 

मां महागौरी का पूजन धन, वैभव और सुख-शांति प्रदान करता हैं।

eight day of navratra, eight day of navratri,the Mahagauri mother worship money, wealth and happiness – peace offers.The worship of Maa mahagaurigets freedom from crisis, Get money, wealth, happiness and peace to The worship of Maa mahagauri, Money, wealth, happiness and peace is achieved from the worship of mother mahagauri, trouble end, scrape was end, deadlock was end, distress was end, hazard was end, danger was end, difficulty was end, mischief was end, slip-up was end, nodus was end, riskiness was end, Money, wealth, joy and peacefully,  joy and tranquility saardiya navratra sep-2011, sharad-navratri, navratri, Second-navratri, navratri-2011, navratri-puja, navratra-story, navratri-festival, navratri-pooja, navratri puja-2011,  Durga Pooja, durga pooja 2011, Navratri Celebrations 28 sep 2011, मां महागौरी का पूजन संकट से मुक्ति दिलाता हैं, मां महागौरी का पूजन धन, वैभव और सुख-शांति प्रदान करता हैं। अष्ठम नवरात्र,

नवरात्र के आठवें दिन माता महागौरी का पूजन, नवरात्रि के आठवें दिन महागौरि की पूजा, नवरात्र व्रत, नवरात्र प्रारम्भ, नवरात्र महोत्सव, नवरात्र पर्व, नवरात्रि, नवरात्री, नवरात्रि पूजन विधि, सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती हैं, शारदीय नवरात्रि का त्योहार,
अष्टम महागौरी
लेखसाभार:गुरुत्वज्योतिषपत्रिका (अक्टूबर-2010)
नवरात्र के  आठवें दिन मां के महागौरी स्वरूप का पूजन करने का विधान हैं।महागौरी स्वरूप उज्जवल, कोमल, श्वेतवर्णा तथा श्वेत वस्त्रधारी हैं। महागौरी मस्तक पर चन्द्र का मुकुट धारण किये हुए हैं। कान्तिमणि के समान कान्ति वाली देवी जो अपनी चारों भुजाओं में क्रमशः शंख, चक्र, धनुष और बाण धारणकिए हुए हैं, उनके कानों में रत्न जडितकुण्डल झिलमिलाते रहते हैं। महागौरीवृषभ के पीठ पर विराजमान हैं। महागौरी गायन एवं संगीत से प्रसन्न होने वालीमहागौरीमाना जाता हैं।
मंत्र:
श्वेते वृषे समरूढ़ाश्वेताम्बराधरा शुचि:। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।
ध्यान:-
वन्दे वांछित कामार्थेचन्द्रार्घकृतशेखराम्।
सिंहारूढाचतुर्भुजामहागौरीयशस्वीनीम्॥
पुणेन्दुनिभांगौरी सोमवक्रस्थितांअष्टम दुर्गा त्रिनेत्रम।
वराभीतिकरांत्रिशूल ढमरूधरांमहागौरींभजेम्॥
पटाम्बरपरिधानामृदुहास्यानानालंकारभूषिताम्।
मंजीर, कार, केयूर, किंकिणिरत्न कुण्डल मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वदनांपल्लवाधरांकांत कपोलांचैवोक्यमोहनीम्।
कमनीयांलावण्यांमृणालांचंदन गन्ध लिप्ताम्॥
स्तोत्र:-
सर्वसंकट हंत्रीत्वंहिधन ऐश्वर्य प्रदायनीम्।
ज्ञानदाचतुर्वेदमयी,महागौरीप्रणमाम्यहम्॥
सुख शांति दात्री, धन धान्य प्रदायनीम्।
डमरूवाघप्रिया अघा महागौरीप्रणमाम्यहम्॥
त्रैलोक्यमंगलात्वंहितापत्रयप्रणमाम्यहम्।
वरदाचैतन्यमयीमहागौरीप्रणमाम्यहम्॥
कवच:-
ओंकार: पातुशीर्षोमां, हीं बीजंमां हृदयो।क्लींबीजंसदापातुनभोगृहोचपादयो॥ललाट कर्णो,हूं, बीजंपात महागौरीमां नेत्र घ्राणों।कपोल चिबुकोफट् पातुस्वाहा मां सर्ववदनो॥
मंत्र-ध्यान-कवच- का विधि-विधान से पूजन करने वाले व्यक्ति का सोमचक्र जाग्रत होताहैं। महागौरी के पूजन से व्यक्ति के समस्त पाप धुल जाते हैं। महागौरी के पूजन करने वाले साधन के लिये मां अन्नपूर्णा के समान, धन, वैभव और सुख-शांति प्रदान करने वाली एवं  संकट से मुक्ति दिलाने वाली देवी महागौरी हैं।
>> गुरुत्वज्योतिष पत्रिका (अक्टूबर -2010)
OCT-2011

मां कालरात्रि के पूजन से शत्रु भय एवं दुष्ट शक्तियों का नाश होता हैं

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सप्तम कालरात्रि
लेखसाभार:गुरुत्वज्योतिषपत्रिका (अक्टूबर-2010)
नवरात्र के  सातवें दिन मां के कालरात्रि स्वरूप का पूजन करने का विधान हैं।कालरात्रि देवी के शरीर का रंगघने अंधकार कि तरह एकदम काला हैं, सिर के बाल फैलाकर रखने वाली हैं।
कालरात्रि का स्वरुप तीन नेत्र वाला एवं गले में चमकने वाली माला धारण करने वाली हैं। कालरात्रि कि आंखों से अग्नि की वर्षाहोती है एवं नासिका केश्वास में अग्नि की भंयकर ज्वालाएं निकलती रहती हैं। कालरात्रि के ऊपर उठे हुए दाहिने हाथ के वरमुद्रासे सभी मनुष्यो को वर प्रदान करती हैं। दाहिनी तरफ कानीचे वाला हाथ अभयमुद्रामें हैं। एक हाथ से शत्रुओं की गर्दन पकडे हुए हैं, दूसरे हाथ में खड्ग-तलवार शस्त्र से शत्रु का नाशकरने वाली कालरात्रि विकट रूप में अपने वाहन गर्दभ(गधे) विराजमान हैं।
मंत्रः
एक वेधी जपाकर्णपूरा नग्नाखरास्थिता। लम्बोष्ठी कणिर्काकणी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।।
वामपदोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा।वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी।।
ध्यान:-
करालवदनां घोरांमुक्तकेशींचतुर्भुताम्।कालरात्रिंकरालिंकादिव्यांविद्युत्मालाविभूषिताम्॥
दिव्य लौहवज्रखड्ग वामाघो‌र्ध्वकराम्बुजाम्।अभयंवरदांचैवदक्षिणोध्र्वाघ:पाणिकाम्॥
महामेघप्रभांश्यामांतथा चैपगर्दभारूढां।घोरदंष्टाकारालास्यांपीनोन्नतपयोधराम्॥
सुख प्रसन्न वदनास्मेरानसरोरूहाम्।एवं संचियन्तयेत्कालरात्रिंसर्वकामसमृद्धिधदाम्॥
स्तोत्र:-
हीं कालरात्रि श्रींकराली चक्लींकल्याणी कलावती।कालमाताकलिदर्पध्नीकमदींशकृपन्विता॥
कामबीजजपान्दाकमबीजस्वरूपिणी।कुमतिघनीकुलीनार्तिनशिनीकुल कामिनी॥
क्लींहीं श्रींमंत्रवर्णेनकालकण्टकघातिनी।कृपामयीकृपाधाराकृपापाराकृपागमा॥
कवच:-
ॐ क्लींमें हदयंपातुपादौश्रींकालरात्रि।ललाटेसततंपातुदुष्टग्रहनिवारिणी॥रसनांपातुकौमारी भैरवी चक्षुणोर्मम
हौपृष्ठेमहेशानीकर्णोशंकरभामिनी।वर्जितानितुस्थानाभियानिचकवचेनहि।तानिसर्वाणिमें देवी सततंपातुस्तम्भिनी॥
मंत्र-ध्यान-कवच- का विधि-विधान से पूजन करने वाले व्यक्ति का भानु चक्र जाग्रत होताहैं। कालरात्रि के पूजन से अग्नि भय, आकाश भय, भूत पिशाच इत्यादी शक्तियां कालरात्रि देवी के स्मरण मात्र से ही भाग जाते हैं,  कालरात्रि का स्वरूप देखने मेंअत्यंत भयानक होते हुवे भी सदैव शुभ फल देने वाला होता हैं, इस लिये कालरात्रि को शुभंकरीके नामसे भी जाना जाता हैं। कालरात्रिशत्रु एवं दुष्टों का संहार कर ने वाली देवी हैं।

OCT-2010

मां कूष्माण्डा के पूजन से आयुष्य, यश, बल और बुद्धि की प्राप्ति होती हैं

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चतुर्थ कूष्माण्डा
नवरात्र के चतुर्थ दिन मां के कूष्माण्डा स्वरूप का पूजन करने का विधान हैं। अपनी मंद हंसी द्वारा ब्रह्माण्ड को उत्पन्न किया था इसीके कारण इनका नाम कूष्माण्डा देवी रखा गया।
शास्त्रोक्त उल्लेख हैं, कि जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तो चारों तरफ सिर्फ अंधकार हि था। उस समय कूष्माण्डा देवी ने अपने मंद सी हास्य से ब्रह्मांड कि उत्पत्ति कि। कूष्माण्डा देवी सूरज के घेरे में निवास करती हैं। इसलिये कूष्माण्डा देवी के अंदर इतनी शक्ति हैं, जो सूरज कि गरमी को सहन कर सकें। कूष्माण्डा देवी को जीवन कि शक्ति प्रदान करता माना गया हैं।
कूष्माण्डा देवी का स्वरुप अपने वाहन सिंह पर सवार हैं, मां अष्ट भुजा वाली हैं। उनके मस्तक पर रत्न जडि़तमुकुट सुशोभित हैं, जिस्से उनका स्वरूप अत्यंय उज्जवल प्रतित होता हैं। उनके हाथमें हाथों में क्रमश: कमण्डल,  माला, धनुष-बाण, कमल, पुष्प, कलश, चक्र तथा गदा सुशोभित रहती हैं।
मंत्र:
सुरासम्पूर्णकलशंरूधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कुष्मांडा शुभदास्तुमे।।
ध्यान:-
वन्दे वांछितकामर्थेचन्द्रार्घकृतशेखराम्।
सिंहरूढाअष्टभुजा कुष्माण्डायशस्वनीम्॥
भास्वर भानु निभांअनाहत स्थितांचतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्।
कमण्डलु चाप, बाण, पदमसुधाकलशचक्र गदा जपवटीधराम्॥
पटाम्बरपरिधानांकमनीयाकृदुहगस्यानानालंकारभूषिताम्।
मंजीर हार केयूर किंकिणरत्‍‌नकुण्डलमण्डिताम्।
प्रफुल्ल वदनांनारू चिकुकांकांत कपोलांतुंग कूचाम्।
कोलांगीस्मेरमुखींक्षीणकटिनिम्ननाभिनितम्बनीम्॥
स्त्रोत:-
दुर्गतिनाशिनी त्वंहिदारिद्रादिविनाशिनीम्।जयंदाधनदांकूष्माण्डेप्रणमाम्यहम्॥
जगन्माता जगतकत्रीजगदाधाररूपणीम्।चराचरेश्वरीकूष्माण्डेप्रणमाम्यहम्॥
त्रैलोक्यसुंदरीत्वंहिदु:ख शोक निवारिणाम्।परमानंदमयीकूष्माण्डेप्रणमाम्यहम्॥
कवच:-
हसरै मेशिर: पातुकूष्माण्डेभवनाशिनीम्।हसलकरींनेत्रथ,हसरौश्चललाटकम्॥कौमारी पातुसर्वगात्रेवाराहीउत्तरेतथा।पूर्वे पातुवैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणेमम।दिग्दिधसर्वत्रैवकूंबीजंसर्वदावतु॥
मंत्र-ध्यान-कवच- का विधि-विधान से पूजन करने वाले व्यक्ति का अनाहत चक्र जाग्रत हो हैं। मां कूष्माण्डाका के पूजन से सभी प्रकार के रोग, शोक और क्लेश से मुक्ति मिलती हैं, उसे आयुष्य, यश, बल और बुद्धि प्राप्त होती हैं।
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OCT-2010

नवरात्री में संपन्न करें नवार्णमन्त्रसाधना

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नवरात्री में संपन्न करें नवार्णमन्त्रसाधना
नवार्णमन्त्रसाधना
लेखसाभार:गुरुत्वज्योतिषपत्रिका (अक्टूबर-2011)
विनियोगः-
अस्यश्रीनवार्णमंत्रस्यब्रह्माविष्णुमहेश्वराऋषिः, गायत्र्युष्णिगनुष्टुभश्छंदांसि, महाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वत्यःदेवताः, नंदजाशाकुंभरीभीमाःशक्तयः, रक्तदंतिकादुर्गाभ्रामयोबीजानि, ह्रौंकीलकम्, अग्निवायुसूर्यास्तत्वानि, कार्यनिर्देशजपेविनियोग।
नवार्णमन्त्र:
ऐंह्रींक्लींचामुण्डायैविच्चे॥
नवार्णभेदमन्त्र:
शास्त्रोंमेंनवार्णमन्त्रकोअपनेआपमेंअत्यन्तसिद्धएवंप्रभावयुक्तमानागयाहैं।नवार्णमन्त्रकोमन्त्रऔरतन्त्रदोनोमेंसमानरुपसेप्रयोगकियाजाताहैं।
नवार्ण मन्त्र केशीघ्रप्रभाविप्रयोगआपकेमार्गदर्शनहेतुदियेजारहेहैं।
चेतावनी:
नवार्णमन्त्रकाप्रयोगअतिसावधानीसेएवंयोग्यगुरु, विद्वानब्राह्मणअथवाजानकारकीसलाहसेकरनाचाहिए।
नवार्णमोहनमन्त्र:
नवार्णमोहनमन्त्रकेबारहलाखजपकरनेकाविधानहैं।इसप्रयोगकोकरनेहेतुसातकुओंयानदियोंकाजलताम्रकलशमेंलेकरउसमेंआमकेपत्तेडालकरनित्यउसीपानीसेस्नानकरनाचाहिए।ललाटपरपीलेचन्दनकातिलककरनाचाहिएऔरशरीरपरपीलेरंगकेवस्त्रहीधारणकरनेचाहिएऔरपीलेरंगकेआसनकाप्रयोगकरनाचाहिए।साधककोपश्चिमकीतरफमुंहकरकेबैठनाचाहिए।बारहलाखमन्त्रजपनेसेयहकार्यसिद्धहोताहैं।
नवार्णमोहनमन्त्र:
क्लींक्लींऐंह्रींक्लींचामुण्डायैविच्चे (अमुकं) क्लींक्लींमोहनम्कुरुकुरुक्लींक्लींस्वाहा।
***
नवार्णउच्चाटनमन्त्र:
नवार्णउच्चाटनमन्त्रके……………..>>
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नवार्णवशीकरणमन्त्र:
इसप्रयोगकोबीसदिनोमेंसंपन्नकरनेकाविधानहैं।नदी, तालाबयाकुएंकेनवार्णउच्चाटनमन्त्रके……………..>>
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नवार्णस्तंभनमन्त्र:
इसप्रयोगमेंसाधककोपूर्वनवार्णउच्चाटनमन्त्रके……………..>>
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नवार्णविद्वेषणमन्त्र:
इसप्रयोगमेंसाधककोउत्तरदिशाकीतरफमुंहकरकेबैठनाचाहिए।तथाकालेरंगका……………..>>
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नवार्णमहामन्त्र:
इसमन्त्रकेउच्चारणमात्रसेदेवीमांप्रसन्नहोतीहैं।यहसंपूर्णनवार्णमहामंत्रहैं।……………..>>
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संपूर्णलेखपढनेकेलियेकृप्यागुरुत्वज्योतिष-पत्रिकाअक्टूबर-2011 काअंकपढें
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OCT-2011

मां ब्रह्मचारिणी के पूजन अनंत फल कि प्राप्ति होती

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द्वितीयं ब्रह्मचारिणी
नवरात्र के दूसरे दिन मां के ब्रह्मचारिणी स्वरूप का पूजन करने का विधान हैं।क्योकि ब्रह्म काअर्थ हैं तप। मां ब्रह्मचारिणी तप का आचरण करने वाली भगवती हैं इसी कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी कहा गया।   Post By : GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH
शास्त्रो में मां ब्रह्मचारिणीको समस्त विद्याओं की ज्ञाता माना गया हैं।  शास्त्रो में ब्रह्मचारिणी देवी केस्वरूप का वर्णन पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यंत दिव्य दर्शाया गया हैं।    Post By : GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH
मां ब्रह्मचारिणी श्वेत वस्त्र पहने उनके दाहिने हाथ में अष्टदल कि जप माला एवंबायें हाथ में कमंडल सुशोभित रहता हैं।शक्ति स्वरुपा देवी ने भगवान शिवको प्राप्त करने के लिए 1000 साल तक सिर्फ फल खाकर तपस्या रत रहीं और 3000 साल तक शिव कि तपस्या सिर्फपेड़ों से गिरी पत्तियां खाकर कि, उनकी इसी कठिन तपस्या के कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी नाम से जाना गया।   Post By : GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH
मंत्र:
दधानापरपद्माभ्यामक्षमालाककमण्डलम्।देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।   Post By : GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH
ध्यान:-
वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्।
जपमालाकमण्डलुधरांब्रह्मचारिणी शुभाम्।
गौरवर्णास्वाधिष्ठानस्थितांद्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।  Post By : GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH
धवल परिधानांब्रह्मरूपांपुष्पालंकारभूषिताम्।
पदमवंदनांपल्लवाधरांकातंकपोलांपीन पयोधराम्।
कमनीयांलावण्यांस्मेरमुखींनिम्न नाभिंनितम्बनीम्।।
स्तोत्र:-
तपश्चारिणीत्वंहितापत्रयनिवारणीम्।ब्रह्मरूपधराब्रह्मचारिणींप्रणमाम्यहम्।।
नवचग्रभेदनी त्वंहिनवऐश्वर्यप्रदायनीम्।धनदासुखदा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥
शंकरप्रियात्वंहिभुक्ति-मुक्ति दायिनीशांतिदामानदाब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्।  Post By : GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH
कवच:-  Post By : GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH
त्रिपुरा मेहदयेपातुललाटेपातुशंकरभामिनी।अर्पणासदापातुनेत्रोअधरोचकपोलो॥पंचदशीकण्ठेपातुमध्यदेशेपातुमाहेश्वरीषोडशीसदापातुनाभोगृहोचपादयो।अंग प्रत्यंग सतत पातुब्रह्मचारिणी॥  Post By : GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH
मंत्र-ध्यान-कवच- का विधि-विधान से पूजन करने वाले व्यक्ति को अनंत फल कि प्राप्ति होती हैं। व्यक्ति में  तप, त्याग, सदाचार, संयम जैसे सद् गुणों कि वृद्धि होती हैं।  Post By : GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH

>> गुरुत्वज्योतिष पत्रिका (अक्टूबर -2011)

OCT-2010

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Oct 2011 free monthly Astrology Magazines, You can read in Monthly GURUTVA JYOTISH Magazines Astrology, Numerology, Vastu, Gems Stone, Mantra, Yantra, Tantra, Kawach & ETC Related Article absolutely free of cost. गुरुत्व ज्योतिष मासिक ई पत्रीका ज्योतिषअंक ज्योतिषवास्तुरत्नमंत्रयंत्रतंत्रकवच इत्यादि प्राचिन गूढ सहस्यो एवं आध्यात्मिक ज्ञान से आपको परिचित कराती हैं।
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गुरुत्व ज्योतिष ई पत्रीका अक्टूबर- 2011 में प्रकशित लेख
आद्य शक्ति विशेष
अनुक्रम
नवरात्र विशेष
नवरात्र में मां दुर्गा के नवरुपोंकिउपासनाकल्याणकारी हैं
6
मां दुर्गा की उपासना क्यों की जाती हैं?
7
शारदीयनवरात्रव्रतसे सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती हैं
8
कैसे करें नवरात्रव्रत?
9
देवी आराधना से अभिष्ट कार्यो की सिद्धि हेतु
11
आश्विन नवरात्रि घट स्थापना मुहूर्त, विधि-विधान
12
सरल विधि-विधान से शारदीयनवरात्रव्रतउपासना
13
नवरात्र स्पेशल घट स्थापना विधि
14
नवार्ण मंत्र से होती हैं नवग्रह शांति
18
दुर्गाष्टाक्षर मन्त्र साधना
22
कुमारी पूजन से सकल मनोरथ सिद्ध होते हैं।
23
माता के 52 शक्ति पीठ
26
नवार्ण मन्त्र साधना
20
दीपावली विशेष
धन तेरस शुभ मुहूर्त (24 अक्तूबर, 2011)
47
दीपावली पूजन मुहूर्त (26-अक्तूबर-2011)
48
लक्ष्मी प्राप्ति हेतु करें राशि मंत्र का जप
53
लक्ष्मी प्राप्ति के सरल उपाय 
54
लक्ष्मी मंत्र
56
दीप जलाने का महत्व क्या हैं?
63
धनत्रयोदशी पर यम-दीपदान अकालमृत्यु को दूर करता हैं
66
धनत्रयोदशी पर यमदीपदान क्यों किया जाता हैं?
68
दीपावली के दिन कैसे करें बहीखाता तुला पूजन?
69
दीपावली का महत्व और लक्ष्मी पूजन विधि
70
श्री धनवंतरि व्रत कथा
71
सप्त श्री का चमत्कार
74
स्फटिक श्रीयंत्र का पूजन
75
मंत्र एवं स्तोत्र
दुर्गा चालीसा
32
श्रीकृष्ण कृत देवी स्तुति,
33
ऋग्वेदोक्त देवी सूक्तम्,
33
सप्‍तश्र्लोकी दुर्गा,
34
दुर्गा आरती,
34
सिद्धकुंजिकास्तोत्रम्‌,
35
भवान्यष्टकम्‌,
36
क्षमा-प्रार्थना,
36
दुर्गाष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम्,
37
विश्वंभरी स्तुति,
38
महिषासुरमर्दिनिस्तोत्रम्,
39
गुप्त सप्तशती,
41
दुर्गाष्टकम्‌,
35
सर्व ऐश्वर्य प्रद-लक्ष्मी-कवच
77
महालक्ष्मी कवच
78
महालक्ष्मी स्तुति
79
श्री कनकधारा स्तोत्र
80
श्री लक्ष्मी चालीसा
81
श्री सूक्त
82
धनलक्ष्मी स्तोत्र
82
अष्टलक्ष्मी स्तोत्र
83
देवकृत लक्ष्मी स्तोत्रम्
83
हमारे उत्पाद
दुर्गा बीसा यंत्र
6
मंत्र सिद्ध दैवी यंत्र सूचि
10
मंत्रसिद्ध लक्ष्मी यंत्रसूचि
10
गणेश लक्ष्मी यंत्र
13
भाग्य लक्ष्मी दिब्बी
17
द्वादश महा यंत्र
21
शादी संबंधित समस्या
37
मंत्र सिद्ध गणेश यंत्र
49
मंगल यंत्र से ऋण मुक्ति
50
मंत्र सिद्ध दुर्लभ सामग्री
55
सर्व कार्य सिद्धि कवच
57
जैन धर्मके विशिष्ट यंत्रोसूची
58
घंटाकर्ण महावीर सर्व सिद्धि महायंत्र
59
अमोद्य महामृत्युंजय कवच
60
राशी रत्न एवं उपरत्न 
60
श्रीकृष्ण बीसा यंत्र/ कवच
61
राम रक्षा यंत्र
62
मंत्र सिद्ध रूद्राक्ष
65
मंत्रसिद्ध स्फटिक श्री यंत्र
67
लक्ष्मी यंत्र
74
कनकधारा यंत्र
80
राशि रत्न
88
मंत्र सिद्ध सामग्री
94
सर्व रोगनाशक यंत्र/
101
मंत्र सिद्ध कवच
103
YANTRA
104
GEMS STONE
106
स्थायी लेख
संपादकीय
4
पति-पत्नी में कलह निवारण हेतु
22
शरद पूर्णिमा (11-अक्टूबर-2011)
44
कोजागरी पूर्णिमा (11-अक्टूबर-2011)
45
दुर्वा पूजनमें रखे सावधानियां
45
करवा चौथ व्रत (15-अक्टूबर-2011)
46
नये कपडे और ज्योतिष
50
मासिकराशिफल
84
अक्टूबर 2011मासिक पंचांग
89
अक्टूबर-2011 मासिक व्रत-पर्व-त्यौहार
 91
अक्टूबर 2011 -विशेष योग
 97
दैनिकशुभ एवं अशुभ समय ज्ञानतालिका
97
दिन-रातकेचौघडिये
98
दिन-रात कि होरासूर्योदय से सूर्यास्त तक
99
ग्रह चलन अक्टूबर-2011
100
सूचना
108
हमाराउद्देश्य
110
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शारदीय नवरात्र व्रत से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती हैं।

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लेखसाभार:गुरुत्वज्योतिषपत्रिका (अक्टूबर-2011)
नवरात्र को शक्तिकीउपासनाकामहापर्व माना गया हैं।मार्कण्डेयपुराण केअनुशारदेवी माहात्म्यमेंस्वयंमां जगदम्बाकावचनहैं-। Post By : GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH

शरत्कालेमहापूजाक्रियतेयाचवार्षिकी।
तस्यांममैतन्माहात्म्यंश्रुत्वाभक्तिसमन्वित:
सर्वाबाधाविनिर्मुक्तोधनधान्यसुतान्वित: 
मनुष्योमत्प्रसादेनभविष्यतिनसंशय:॥ Post By : GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH

अर्थातः शरदऋतुकेनवरात्रमेंजब मेरीवार्षिकमहापूजाहोती हैं, उसकाल में जोमनुष्य मेरेमाहात्म्य (दुर्गासप्तशती) कोभक्तिपूर्वकसुनेगा, वहमनुष्यमेरेप्रसादसेसबबाधाओंसेमुक्तहोकरधन-धान्यएवंपुत्रसेसम्पन्नहो जायेगा। Post By : GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH
नवरात्र मेंदुर्गासप्तशती कोपढनेया सुननेसेदेवीअत्यन्तप्रसन्नहोतीहैं एसा शास्त्रोक्त वचन हैं। सप्तशतीकापाठउसकीमूलभाषासंस्कृतमेंकरनेपरहीपूर्णप्रभावी होताहैं। Post By : GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH
व्यक्ति को श्रीदुर्गासप्तशती कोभगवतीदुर्गाकाहीस्वरूपसमझनाचाहिए।पाठकरनेसेपूर्वश्रीदुर्गासप्तशती कि पुस्तकका इसमंत्रसेपंचोपचारपूजनकरेंPost By : GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH
नमोदेव्यैमहादेव्यैशिवायैसततंनम:नम:प्रकृत्यैभद्रायैनियता:प्रणता:स्मताम्॥ 
जो व्यक्ति दुर्गासप्तशतीके मूलसंस्कृतमेंपाठकरनेमेंअसमर्थहोंतो उस व्यक्ति को सप्तश्लोकीदुर्गाकोपढने से लाभ प्राप्त होता हैं।क्योकि सातश्लोकोंवालेइसस्तोत्रमेंश्रीदुर्गासप्तशतीकासारसमाया हुवाहैं।
जो व्यक्ति सप्तश्लोकीदुर्गाका भीकरसकेवहकेवलनर्वाणमंत्रकाअधिकाधिकजपकरें।
देवीकेपूजनकेसमयइसमंत्रका जप करे।
जयन्तीमङ्गलाकालीभद्रकालीकपालिनी।
दुर्गाक्षमाशिवाधात्रीस्वाहास्वधानमोऽस्तुते॥
देवीसे प्रार्थनाकरें-
विधेहिदेविकल्याणंविधेहिपरमां -श्रियम्।रूपंदेहिजयंदेहियशोदेहिद्विषोजहि॥
अर्थातः हे देवि! आप मेराकल्याणकरो।मुझेश्रेष्ठसम्पत्तिप्रदानकरो।मुझेरूपदो, जयदो, यशदोऔरमेरेकाम-क्रोधइत्यादिशत्रुओंकानाशकरो।
विद्वानो के मतानुशार सम्पूर्णनवरात्रव्रतकापालनकरने में जो लोगोंअसमर्थ हो वह नवरात्र के सात रात्री,पांच रात्री, दों रात्री और एक रात्री का व्रत करके भी विशेष लाभ प्राप्त कर सकते हैं।नवरात्र मेंनवदुर्गाकीउपासनाकरनेसेनवग्रहोंकाप्रकोपस्वतः शांतहो जाताहैं।

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OCT-2011

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