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Surya Grahan ka prabhav 4 january 2011

सूर्य ग्रहण का प्रभाव (4 जनवरी, 2011)
4 जनवरी, 2011 के दिन लगने वाला सूर्य ग्रहण आंशिक सूर्य ग्रहण होगा जिस का प्रभाव पृथ्वी पर दोपहर 12:10 से 16:31 मिनट तक रहेगा। भारत में ग्रहण काल सबसे पहले 4:37 मिनट पर प्रारम्भ होगा। यहं आंशिक सूर्य ग्रहण होने के कारण ग्रहण कि थोडी सी झलक भारत के कुछ राज्यो में हि दिखाई पड सकती हैं।
जानकारो के अनुशार इस वर्ष भारत में सूर्य ग्रहण दोपहर के समय दिल्ली, उतर भारत, पश्चिम भारत, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, उतराखण्ड के हिस्सो में दिखाई देगा।
भारत के अलावा अन्य देशों में भी दिखेगा आंशिक सूर्य ग्रहण।
इस वर्ष 2011 में तीन सूर्य ग्रहण दिखाई देंगे और तीनो आंशिक सूर्य होंगे।
04 जनवरी 2011 को आंशिक सूर्य ग्रहण।
01 जून 2011 को आंशिक सूर्य ग्रहण।
01 जूलाई 2011 को आंशिक सूर्य ग्रहण लगेगा।
4 जनवरी, 2011 ग्रहण का सूतक (अशुद्ध समय)
4 जनवरी, 2011 को ग्रहण का सूतक काल प्रात: 2 बजकर 37 मिनट से प्रारम्भ होगा।
विद्वानो के मत से बालक, वृद्ध, रोगी एवं गर्भवती स्त्रियों को छोडकर अन्य लोगों पर सूतक का प्रभाव होता हैं। इस कारण सूतक काल से पूर्व भोजनादि ग्रहण कर लेना उचित रहता हैं। सूतक काल प्रारंभ होने से पूर्व द्रव्य पदार्थ जैसे दूध,
दही, आचार, चटनी, मुरब्बा इत्यादि में कुशा रख देना चाहिये जिस्से ग्रहण के प्रभाव से यह सामग्रीया अशुद्ध नहीं होती है। परंतु सूखे खाद्य पदार्थों में अशुद्धता नहीं होती हैं।
ग्रहण अवधि में किये जाने वाले धार्मिक कार्य
ग्रहण के स्पर्श काल में स्नान, ग्रहण मध्य काल में हवन, इष्ट आराधना, मंत्र जाप ग्रहण मोक्ष काल में श्राद्ध, अन्न, वस्त्र, धनादि का दान सर्व मुक्त होने पर स्नान करना चाहिए।
ग्रहण काल में तीर्थ स्थलों में जल स्नान का महत्व
ग्रहण काल में स्नान के लिये प्रयोग किये जाने वाले जलों में समुद्र का जल सबसे श्रेष्ठ कहा गया है। एसी मान्यता हैं कि ग्रहण काल में समुद्र नदी के जल या तीर्थ स्थान पर स्थित की नदी में स्नान करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती हैं। यदि किसी कारण से नदी का जल स्नान करने के लिये न मिल पाये तो तालाब का जल प्रयोग किया जा सकता है। वह भी न मिले तो झरने क जल प्रयोग में लेना चाहिए। यह भी न मिले तो भूमि में स्थित जल को स्नान के लिये लिया जा सकता है।
ग्रहण में ध्यान देने योग्य अन्य बातें
विद्वानो के मत से ग्रहण के समय धारण किये हुए वस्त्र आदि को ग्रहण के पश्चात धोकर एवं शुद्ध करके ही धारण करना चाहिये।ग्रहण के प्रभाव से मुक्त क्षेत्र जिस स्थन पर ग्रहण दिखाई नहीं देगा उस क्षेत्र के निवासियों को ग्रहण काल के सूतक, स्नान-दान, आदि आवश्यक नहीं होता।

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