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व्रत-उपवास द्वारा ग्रह शांति
व्यक्ति कि जन्म कुंडली के अनुसार जो ग्रह पीडा कारक या के दुःख दायी हो, तो ग्रहो से संबंधित वार के अनुशार व्रत करना चाहिये। ग्रह से संबंधित वार का व्रत करने से ग्रह अपना अशुभ प्रभाव दूर कर शुभ प्रभाव देने हेतु मजबूर जाते हैं, जैसे दुष्ट से दुष्ट व्यक्ति को यदि हम दो हाथ जोड कर प्रणाम कर दे तो उसका भी हृदय परिवर्तन हो जाता हैं। थिक उसी प्रकार यदि प्रतिकूल ग्रहो के दुष्ट प्रभाव को उस ग्रह कि पूजा-अर्चना, मंत्र जाप या व्रत उपवास करने से ग्रहो के भी अशुभ प्रभाव स्वतः दूर हो जाते हैं।
रविवार का व्रत
रविवार का व्रत सूर्य ग्रह को प्रसन्न करने हेतु किया जाता हैं। सूर्य का व्रत करने से हडीया मजबूत होती हैं, पेट संबंधी सभी रोगो का विनाश होता हैं, आंखो कि रोशनी बढती हैं, व्यक्ति का साहर एवं क्षमता में वृद्धि होकर उसका यश चारों और बढता हैं। रविवार का व्रत करने से सूर्य के प्रभाव में आने वाले सभी व्यवसाय एवं वस्तुओ से लाभ प्राप्त होता हैं।
 
सोमवार का व्रत
सोमवार का व्रत चंद्र ग्रह को प्रसन्न करने हेतु किया जाता हैं। जिस्से व्यक्तिने फेफडे के रोग, दमा, मानसिक रोग से मुक्ति मलती हैं। व्यक्तिनी चंलता दूर होती हैं, नशे कि लत छुडाने हेतु लाभ प्राप्त होता हैं, स्त्रीओं में मासिक रक्त-स्त्राव कि पीडा कम होती हैं। सोमवार का व्रत शिव को प्रिय हैं इस लिये अविवाहित लडकीयो कें १६ सोमवार का व्रत करने से उत्तम वर कि प्राप्ति होती हैं। सोमवार का व्रत करने से चंद्र के प्रभाव में आने वाले सभी व्यवसाय एवं वस्तुओ से लाभ प्राप्त होता हैं।
 
मंगलवार का व्रत
मंगल का व्रत मंगल ग्रह को प्रसन्न करने हेतु किया जाता हैं। जिस का व्यक्ति स्वभाव उग्र या हिंसात्मक, अधिक गुस्से वाला हो उनके मंगलवार का व्रत करने से मन शांत होता हैं। मंगलवार का व्रत गणपतीजी, हनुमानजी को प्रसन्न करने हेतु भी किया जाता हैं। मंगलवार का व्रत करने से भूत-प्रेत बाधा दूर होती हैं, व्यक्ति के सभी संकट दूर होजाते हैं। अविवाहित लडको के व्रत करने से उसकि बुद्धि और बल का विकास होता हैं। मंगलवार का व्रत करने से मंगल के प्रभाव में आने वाले सभी व्यवसाय एवं वस्तुओ से लाभ प्राप्त होता हैं।
 
बुधवार का व्रत
बुधवार का व्रत बुध ग्रह को प्रसन्न करने हेतु किया जाता हैं। बुधवार का व्रत व्यवसाय करने वालो हेतु लाभदायी होता हैं। बुधवार का व्रत गणेश जी एवं मां दुर्गा कि कृपा प्राप्ति हेतु किया जाता हैं। इस व्रत के करने से बुद्धिका विकास होता हैं, इस दिन व्रत के साथ दुर्गा सप्तशतीका पाठ करने से मनोवांछित फल कि प्राप्ति होती हैं। बुधवार का व्रत करने से बुध के प्रभाव में आने वाले सभी व्यवसाय एवं वस्तुओ से लाभ प्राप्त होता हैं।
 
गुरुवार का व्रत
गुरुवार का व्रत बृहस्पति ग्रह को प्रसन्न करने हेतु किया जाता हैं। गुरुवार का व्रत करने से धन – संपत्ति कि प्राप्ति होती हैं घर में सुख-शांति और समृद्धि बढती हैं। लडकी के विवाह में आरही बाधाएं दूर होती हैं। गुरुवार का व्रत करने से बृहस्पति के प्रभाव में आने वाले सभी व्यवसाय एवं वस्तुओ से लाभ प्राप्त होता हैं।
 
शुक्रवार का व्रत
शुक्रवार का व्रत शुक्र ग्रह को प्रसन्न करने हेतु किया जाता हैं। शुक्रवार का व्रत करने से व्यक्ति के सौंदर्य में वृद्धि होती हैं, गुप्त रोगोमें लाभ होता हैं, भोग-विलास कि चिज वस्तु में वृद्धि होती हैं। शुक्रवार का व्रत करने से शुक्र के प्रभाव में आने वाले सभी व्यवसाय एवं वस्तुओ से लाभ प्राप्त होता हैं।
 
शनिवार का व्रत
शनिवार का व्रत शनि ग्रह को प्रसन्न करने हेतु किया जाता हैं। शनिवार का व्रत करने से संपत्ति में वृद्धि होती हैं, खोया हुवा धन पूनः प्राप्त होता हैं। शिक्षा प्राप्ति में आरहे बाधा विघ्न दूर होते हैं। पेटा और पैर के रोग में लाभ प्राप्त होता हैं, पूराने रोग भी थिक होजाते हैं। शनिवार का व्रत करने से शनि के प्रभाव में आने वाले सभी व्यवसाय एवं वस्तुओ से लाभ प्राप्त होता हैं।
इस प्रकार ग्रहो के शुभ प्राभाव से निश्चिंत लाभ प्राप्त हो्ता हैं इस में जरा भी संदेह नहीं हैं, पूर्ण आस्था एवं विश्वास से किया गया व्रत अधिक प्रभाव शाली होते हैं।
• व्रत के दिन सुबह या रात्री एक समय सात्विक भोजन करें।
• कुछ व्रत में फलाहार कर सकते हैं एवं दूध-चाय-कोफी पीसकते हैं।
• ब्रह्मचर्य का पालन करें।
• नशे से परहेज करें।

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