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मंत्र जप क्या हैं?
राम चरित मानस के अनुशार:
कलियुग केवल नाम आधारा, जपत नर उतरे सिंधु पारा।
इस कलयुग में भगवान का नाम ही एक मात्र आधार हैं। जो लोग भगवान के नाम का जप करते हैं, वे इस संसार सागर से तर जाते हैं।
जप अर्थात क्या हैं?
ज+प= जप
ज = जन्म का नाश,
प = पापों का नाश।
जन्मों जन्म के पापो का जो नाश करता हैं उसे जप कहते हैं।
उसे जप कहते हैं, जो पापों का नाश करके जन्म-मरण करके चक्कर से छुड़ा दे ।
जप परमात्मा के साथ सीधा संबंध जोड़ने की एक कला का नाम हैं ।
इसीलिए कहा जाता हैः
अधिकम् जपं अधिकं फलम्।
तुलसीदास जी ने मंत्र जप की महिमा में कहा हैं।
मंत्रजाप मम दृढ़ बिस्वासा।
पंचम भजन सो वेद प्रकासा।।
(श्रीरामचरित. अर. कां. 35-1)
मंत्र का अर्थ ही हैः
मननात् त्रायते इति मंत्रः।
अर्थात: जिसका मनन करने से जो त्राण करे, रक्षा करे उसे मंत्र कहते हैं।

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