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लेखसाभार:गुरुत्वज्योतिषपत्रिका (अक्टूबर-2011)
नवरात्र को शक्तिकीउपासनाकामहापर्व माना गया हैं।मार्कण्डेयपुराण केअनुशारदेवी माहात्म्यमेंस्वयंमां जगदम्बाकावचनहैं। Post By : GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH

शरत्कालेमहापूजाक्रियतेयाचवार्षिकी।
तस्यांममैतन्माहात्म्यंश्रुत्वाभक्तिसमन्वित:
सर्वाबाधाविनिर्मुक्तोधनधान्यसुतान्वित: 
मनुष्योमत्प्रसादेनभविष्यतिनसंशय:॥ Post By : GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH

अर्थातः शरदऋतुकेनवरात्रमेंजब मेरीवार्षिकमहापूजाहोती हैं, उसकाल में जोमनुष्य मेरेमाहात्म्य (दुर्गासप्तशती) कोभक्तिपूर्वकसुनेगा, वहमनुष्यमेरेप्रसादसेसबबाधाओंसेमुक्तहोकरधनधान्यएवंपुत्रसेसम्पन्नहो जायेगा। Post By : GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH
नवरात्र मेंदुर्गासप्तशती कोपढनेया सुननेसेदेवीअत्यन्तप्रसन्नहोतीहैं एसा शास्त्रोक्त वचन हैं। सप्तशतीकापाठउसकीमूलभाषासंस्कृतमेंकरनेपरहीपूर्णप्रभावी होताहैं। Post By : GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH
व्यक्ति को श्रीदुर्गासप्तशती कोभगवतीदुर्गाकाहीस्वरूपसमझनाचाहिए।पाठकरनेसेपूर्वश्रीदुर्गासप्तशती कि पुस्तकका इसमंत्रसेपंचोपचारपूजनकरें– Post By : GURUTVA KARYALAY, GURUTVA JYOTISH
नमोदेव्यैमहादेव्यैशिवायैसततंनम:नम:प्रकृत्यैभद्रायैनियता:प्रणता:स्मताम्॥ 
जो व्यक्ति दुर्गासप्तशतीके मूलसंस्कृतमेंपाठकरनेमेंअसमर्थहोंतो उस व्यक्ति को सप्तश्लोकीदुर्गाकोपढने से लाभ प्राप्त होता हैं।क्योकि सातश्लोकोंवालेइसस्तोत्रमेंश्रीदुर्गासप्तशतीकासारसमाया हुवाहैं।
जो व्यक्ति सप्तश्लोकीदुर्गाका भीकरसकेवहकेवलनर्वाणमंत्रकाअधिकाधिकजपकरें।
देवीकेपूजनकेसमयइसमंत्रका जप करे।
जयन्तीमङ्गलाकालीभद्रकालीकपालिनी।
दुर्गाक्षमाशिवाधात्रीस्वाहास्वधानमोऽस्तुते॥
देवीसे प्रार्थनाकरें
विधेहिदेविकल्याणंविधेहिपरमां -श्रियम्।रूपंदेहिजयंदेहियशोदेहिद्विषोजहि॥
अर्थातः हे देवि! आप मेराकल्याणकरो।मुझेश्रेष्ठसम्पत्तिप्रदानकरो।मुझेरूपदो, जयदो, यशदोऔरमेरेकामक्रोधइत्यादिशत्रुओंकानाशकरो।
विद्वानो के मतानुशार सम्पूर्णनवरात्रव्रतकापालनकरने में जो लोगोंअसमर्थ हो वह नवरात्र के सात रात्री,पांच रात्री, दों रात्री और एक रात्री का व्रत करके भी विशेष लाभ प्राप्त कर सकते हैं।नवरात्र मेंनवदुर्गाकीउपासनाकरनेसेनवग्रहोंकाप्रकोपस्वतः शांतहो जाताहैं।

>> गुरुत्वज्योतिष पत्रिका (अक्टूबर –2011)

OCT-2011

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