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धनतेरसशुभमुहूर्त (24 अक्तूबर, 2011)
लेखसाभार: गुरुत्वज्योतिषपत्रिका (अक्टूबर-2011)
एसी पौराणिक मान्यता हैं कि धन तेरस के दिन धनवंतरी नामक देवता अमृत कलश के साथ सागर मंथन से उत्पन्न हुए थे। धनवंतरी धन, स्वास्थय व आयु के अधिपति देवता हैं। धनवंतरी को देवों के वैध व चिकित्सक के रुप में जाना जाता हैं।GURUTVA KARYALAY | GURUTVA JYOTISH
धन तेरस के दिन चांदी के बर्तन-सिक्के खरीदना विशेष शुभ होता हैं। क्योकि शास्त्रों में धनवंतरी देव को चंद्रमा के समान माना गया हैं। धन तेरस के धनवंतरी के पूजन से मानसिक शान्ति, मन में संतोष एव स्वभाव में सौम्यता का भाव आता हैं। जो लोग अधिक से अधिक धन एकत्र करने कि कामना करते हों उन्हें धनवंतरी देव कि प्रतिदिन आराधना करनी चाहिए। धनतेरस पर पूजा करने से व्यक्ति में संतोष,  स्वास्थय, सुख व धन कि विशेष प्राप्ति होती हैं। जिन व्यक्तियों के उत्तम स्वास्थय में कमी तथा सेहत खराब होने कि आशंकाएं बनी रहती हैं उन्हें विशेष रुप से इस शुभ दिन में पूजा आराधना करनी चाहिए। धनतेरस में खरीदारी शुभ मानी जाती हैं। लक्ष्मी जी एवं गणेश जी कि चांदी कि प्रतिमा-सिक्को को इस दिन खरिदना……………..>>
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धनतेरसपूजामुहूर्त GURUTVA KARYALAY | GURUTVA JYOTISH
प्रदोष काल 2 घण्टे एवं 24 मिनट का होता हैं। अपने शहर के सूर्यास्त समय अवधि से लेकर अगले 2 घण्टे 24 मिनट कि समय अवधि को प्रदोष काल माना जाता हैं। अलग- अलग शहरों में प्रदोष काल के निर्धारण का आधार सूर्योस्त समय के अनुशार निर्धारीत करना चाहिये। धनतेरस के दिन प्रदोषकाल में दीपदान व लक्ष्मी पूजन करना शुभ रहता है।GURUTVA KARYALAY | GURUTVA JYOTISH
इस वर्ष 24 अक्तूबर, 2011 (धनतेरस) को भारतीय समय अनुशार नई दिल्ली में संध्या सूर्यास्त के बाद 05 बज कर 44 मिनिट से आरम्भ होकर रात के 08 बजकर 06 मिनट तक का समय प्रदोष काल रहेगा। इस समया अवधि में स्थिर लग्न  (वृषभ) भी मुहुर्त समय में होने के कारण घर-परिवार में स्थायी लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।GURUTVA KARYALAY | GURUTVA JYOTISH
24 अक्तूबर, 2011 को प्रदोष काल में भी स्थिर लग्न (वृषभ राशि) हो रहा हैं, स्थिर लग्न का समय सबसे उतम माना जाता हैं। धन तेरस के दिन प्रदोष काल व स्थिर लग्न दोनों का संयोग संध्या 06:54:31 बजे से लेकर रात्री……………..>>
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चौघाडियामुहूर्तGURUTVA KARYALAY | GURUTVA JYOTISH
·    अमृतमुहूर्तसुबह06:10 से07:37 तकGURUTVA KARYALAY | GURUTVA JYOTISH
·    शुभमुहूर्तसुबह 09.04 से10:32 तक
·                     ·    चलमुहूर्तदोपहर 01:34 से02:58 तक
·                    ·         लाभमुहूर्तदोपहर………
·                    ·          अमृतमुहूर्तदोपहर……….KARYALAY | GURUTVA JY…OTISH
·    चलमुहूर्तसंध्या……….
·                     ·   लाभमुहूर्तरात्री  …….……………..>>
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शुभ महूर्त का समय धन तेरस की पूजा के लिये विशेष शुभ रहेगा। लाभ मुहूर्त पूजन करने से प्राप्त होने वाले लाभों में वृद्धि होती हैं। शुभ काल मुहूर्त कि शुभता से धन, स्वास्थय व आयु में वृद्धि होती हैं। सबसे अधिक शुभ अमृत काल में पूजा करने का होता हैं।GURUTVA KARYALAY | GURUTVA JYOTISH
नोट:उपरोक्त वर्णित सूर्यास्त का समय निरधारण नई दिल्ली के अक्षांश रेखांश के अनुशार आधुनिक पद्धति से किया गया हैं। इस विषय में विभिन्न मत एवं सूर्यास्त ज्ञात करने का तरीका भिन्न होने के कारण सूर्यास्त समय का निरधारण भिन्न हो सकता हैं। सूर्यास्त समय का निरधारण स्थानिय सूर्यास्त के अनुशार हि करना उचित होगा
>> गुरुत्वज्योतिष पत्रिका (अक्टूबर –2011)
OCT-2011
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